#56 Shayari

हर बात पे उसकी, कुछ कहने को था, और आज भी है, खामोशियां मेरी.

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#55 Shayari

तोहफे से अलफ़ाज़ ना छुपा, राज़-ए-बयान करें आंखें जहां. महज़ चीज़ों की नहीं हमारी दास्तां, जो दिल कहे, वो इस दिल को सुना.