कुछ इस तरह मेरी पलकें…

कुछ इस तरह मेरी पलकें उनसे मिल आतीं, शब्दों से नहीं, अश्कों से वो नज़्म कह जाती, मिल जाता कुछ खोया सा, फिर जुड़ जाता कुछ टूटा सा, यादों में ढलती कई और शामें, खाली दिल थोडा भर जाता, मूह फेर लेते तनहाइयों से एक और बार, फ़ैल जाती अंगड़ाईयों सी चेहरे पे मुस्कान, कुछ [...]