शब्द

शब्दों का क्या है, कुछ अधूरे हैं, कुछ पुरे हैं, कुछ लाठी के सहारे हैं, कुछ बोझ तले दबे हैं, कुछ साज़ में घुले हैं, कुछ हैं नासाज़, कुछ समेट लेते हैं, कुछ बिखेर देते हैं, कुछ किताबों में दबे हैं, कुछ भीतर-ही-भीतर जा छिपे हैं, जो वादियों में सुनाई दे वो गूंज बन जाते …

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#32 Shayari

वो शब्द ही कहां, जिन्हें मैं शब्दों में पिरो सकूं, जो महसूस वो शब्द करा गए...