बिछड़ती यादें संभालूं कैसे?

बेनाम था वो रिश्ता, जिससे हाल-ए-दिल बयान किया, गुमनाम था वो चेहरा, फिर भी मेरे सपनों की परछाई बना. दोस्ती के मायने क्या समझूं, जब दोस्त ही पल भर में बदल जाते हैं, इन मिट्टी के पुतलों को कैसे संजो कर रखूं, जो गीले होते ही बिखर जाते हैं. करीब तो नहीं थे, लेकिन दूरियां …