#Shayari 62

आज भी उनसे दूरियों का रिश्ता बनाये हुए हैं, क्या पता कब, हमें ये भी तोड़ना पड़े.

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#Shayari 59

जब भी कुछ लिखा है, तुझे याद किया है, ज़ख्म और मरहम का ये, नायाब रिश्ता रहा है.

#Shayari 55

तोहफे से अलफ़ाज़ ना छुपा, राज़-ए-बयान करें आंखें जहां. महज़ चीज़ों की नहीं हमारी दास्तां, जो दिल कहे, वो इस दिल को सुना.