इश्क

है रब की नेमत आज भी मुझपे, कुछ बीते लम्हों की मुस्कान आज भी है, निगाहें ढूंड रही हैं वो सारे रिश्ते, जिनसे महक तेरी आती है. कमियां तो हैं; तू पूरी करदे, वो दो रिश्ते मुझे एक आखरी दफा देदे, दिल टूट जाए वो मोहब्बत का नाटक करदे, नमूना बनादे, बेवफाई करके. तुझसे गिले, [...]

#27 Shayari

वक़्त की पाबंदियां कहां, दो-चार बातें और कह जाओ, लफ़्ज़ों में तुम बयां करना, तहज़ीब हम रखेंगे, तुम्हें बताने को कहानियां मिल जायेंगी, हम उसे गुफ्तगू कह देंगे.