#47 Shayari

पैसा ज़रुरत है, ज़रूरतों को पूरा करने की, खुशियों को पाने की कीमत की सीमा कहां.

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इश्क

है रब की नेमत आज भी मुझपे, कुछ बीते लम्हों की मुस्कान आज भी है, निगाहें ढूंड रही हैं वो सारे रिश्ते, जिनसे महक तेरी आती है. कमियां तो हैं; तू पूरी करदे, वो दो रिश्ते मुझे एक आखरी दफा देदे, दिल टूट जाए वो मोहब्बत का नाटक करदे, नमूना बनादे, बेवफाई करके. तुझसे गिले, …