कुछ ऐसा है हाल

है ये कैसी हार मोहब्बत, खुद को हार बैठा, फिर भी ज़हन में जीत महसूस होती है. है ये कैसी नाकामी प्यार, बिछड़के भी उसकी कमी नहीं लगती है, यादों में वो आज भी नयी है. है ये कैसी तिश्नगी इश्क, उम्र यादों में ढलती जा रही है, धड़कने यूं ही बढती जा रही हैं. …

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इश्क

है रब की नेमत आज भी मुझपे, कुछ बीते लम्हों की मुस्कान आज भी है, निगाहें ढूंड रही हैं वो सारे रिश्ते, जिनसे महक तेरी आती है. कमियां तो हैं; तू पूरी करदे, वो दो रिश्ते मुझे एक आखरी दफा देदे, दिल टूट जाए वो मोहब्बत का नाटक करदे, नमूना बनादे, बेवफाई करके. तुझसे गिले, …

#17 Shayari

शिद्दत की कमी कहां हममें, पत्थर दिल से मोहब्बत जो कर गुज़रे, खुद से बेरुखी का सबब, शायद इश्क करके बयां होगा.

ये कैसी मोहब्बत…

सब कुछ भूल भी जाऊं तो वो रात याद आती है, मेरे कानों में गूंजती तेरी हर बात याद आती है, ये नज़रें भी जा टकराई तो किससे, होश गवां बैठा वो शरमाई कुछ ऐसे... मेरे दिल की ना जाने किस गहराई में तू बसती है, जब तक थी तू... अब जिंदगी खाली सी लगती …