कभी यूं भी तो हो

कभी यूं भी तो हो, कि मैं ना लिखूं, पर तुम पढ़ सको. कांटें चुभ उठे, जब गुलशन में पुष्प ना दिखें. दाना-पानी हर दिन मिले, फिर भी पंछी छत पर उतरे ना हो, कई दिनों की ख़ामोशी से भी, रिश्तों में मिठास की कमी न हो, जिनकी सिर्फ बेटियां हों, वो बेटे की चाह …

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Impressions

A smile, a handshake or sad It can be, Cynical can be thoughts, when Again we would meet. What a kiss left on lips, Wasn’t what it left on the cheek? Needy or you wanted, A hug as a safe keep. Sea rushed, so the ocean Alone couldn’t erase, The memories of today, Which in …

शब्द

शब्दों का क्या है, कुछ अधूरे हैं, कुछ पुरे हैं, कुछ लाठी के सहारे हैं, कुछ बोझ तले दबे हैं, कुछ साज़ में घुले हैं, कुछ हैं नासाज़, कुछ समेट लेते हैं, कुछ बिखेर देते हैं, कुछ किताबों में दबे हैं, कुछ भीतर-ही-भीतर जा छिपे हैं, जो वादियों में सुनाई दे वो गूंज बन जाते …

You’ll miss these words

When you’ll decline, Your nerves will feel the pressure, How lethargy ever soothes a soul? You’ll miss these words. The ending which felt ecstatic at once, The thunder beneath your skin would be such, When pace towards peace won’t find its cradle, You’ll miss these words. When cold feet tries to drag, Heart would pump …

छोटी माँ

अगर उस दिन आप, वो दस पन्ने की किताब मुझे देतीं, कि मैं एक वाक्य में आपके लिए कुछ कह सकूं, तो मैं वो किताब रख लेती, फिर भी शायद शब्दों से भेद-भाव हो जाता, कयोंकि प्यार लिखके समझाना नहीं आता, कहीं विराम नहीं लगाती, और किताब एक वाक्य बन जाती. वो तुम से ही …

है तो ये रोग ही

है ये भी अच्छा मर्ज़ हमें, उनकी चाह के रुओं से सिमटे, उँगलियों में जैसे पड़ी हो सिलवटें, खीच लाती है उसकी प्यास हमें. हां है तो ये रोग ही, हर पल थोड़ा ज्यादा ही लगता है, कुछ देर और ठहर जाए, उसके रंग में मन रमता है. कुछ कहदो और थोड़ा सहला भी दो, …