#27 Shayari

वक़्त की पाबंदियां कहां, दो-चार बातें और कह जाओ, लफ़्ज़ों में तुम बयां करना, तहज़ीब हम रखेंगे, तुम्हें बताने को कहानियां मिल जायेंगी, हम उसे गुफ्तगू कह देंगे.

When a father misses his daughter

दीवारें अब भी मुस्कुरा रही हैं, समा गया है खिलखिलाना उसका, वीरानियां तो दिल के कोने-कोने में हैं , गुरैया की तरह, उसका चेहचहाना भी कम ही सुनाई देता है.