#Shayari 56

हर बात पे उसकी, कुछ कहने को था, और आज भी है, खामोशियां मेरी.

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#Shayari 55

तोहफे से अलफ़ाज़ ना छुपा, राज़-ए-बयान करें आंखें जहां. महज़ चीज़ों की नहीं हमारी दास्तां, जो दिल कहे, वो इस दिल को सुना.

है तो ये रोग ही

है ये भी अच्छा मर्ज़ हमें, उनकी चाह के रुओं से सिमटे, उँगलियों में जैसे पड़ी हो सिलवटें, खीच लाती है उसकी प्यास हमें. हां है तो ये रोग ही, हर पल थोड़ा ज्यादा ही लगता है, कुछ देर और ठहर जाए, उसके रंग में मन रमता है. कुछ कहदो और थोड़ा सहला भी दो, …