कभी यूं भी तो हो

कभी यूं भी तो हो, कि मैं ना लिखूं, पर तुम पढ़ सको. कांटें छुभ उठे, जब गुलशन खिले ना हों. दाना-पानी हर दिन मिले, फिर भी पंछी छत से उडें ना हो. कई दिन सूरज ना निकले, लेकिन रिश्तों में मिठास कभी ना ढले. जिनकी सिर्फ बेटियां हों, वो बेटे की चाह में जिंदगानी …

Advertisements

#Shayari 55

तोहफे से अलफ़ाज़ ना छुपा, राज़-ए-बयान करें आंखें जहां. महज़ चीज़ों की नहीं हमारी दास्तां, जो दिल कहे, वो इस दिल को सुना.

शब्द

शब्दों का क्या है, कुछ अधूरे हैं, कुछ ना-साज़ हैं, कुछ लाठी के सहारे हैं, कुछ बोझ तले झुके हैं, कुछ समेट लेते हैं, कुछ बिखेर देते हैं, कुछ किताबों में दफ़न किये, कुछ ब्लोकेज का राज़ बने, कुछ वादियों में सुनाई दे वो गूंज बन जाते हैं, कुछ खुद ही को खामोश कर जाते …