#76 Shayari

रफ़ू तो कर दूं, लेकिन आंखों से ओझल कैसे करूं? रह गयी हैं ये दूरियां जिन्हें करवटें ना भर सकी.

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#75 Shayari

अब तो यूं हो गया है कि, तेरा नाम सुनकर भी तेरी याद नहीं आती.