#68 Shayari

गर ख्वाहिशों में आवाज़ होती, तो तुम भी जान लेते, मगर ये तो धीमी धमनियां हैं, रात में माँ की लोरी जैसी.

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आज फिर

आज फिर तुम्हें याद किया है, अब शायद हर आने वाले दिन, मैं तुमसे यही कहूंगा. तुम्हारे बिना जैसे पहले रहता था, अब वैसे भी नहीं रह सकूंगा, अकेला था तो ही अच्छा था, अब यादों का सहारा है, पर दिल तो अब भी बच्चे सा कच्चा है. नज़रें हर ओर पहुच जाती हैं, पर …