#50 Shayari

हम बेशक एक ही छत के नीचे क्यों न रहते हों, परंतु कई सारी दीवारों को लांघने के बाद, एक बार मिल पाते हैं.

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Cos it was you…

Not bonded by blood or hereditary, Yet what we have is true, Nor I conceived you my cracked egg, But the care is all for you, Sister from another mother, Else we would've been Jerry and Tom, Thank god you are not a brother, Else half my side wouldn't come across, Neither less than a …

मेरी दादी

मम्मी दादी कहूं या मम्मा, सब तेरे ही नाम हैं, आसमां के किसी घने बदल के पीछे से निहारती हो, नहीं तो सपनों में आकर अपनी फ़रमाइशें जताती हो, अच्छा ही है की अपने होने का एहसास हर बार दिलाती हो. हर ग्यारह तारीख को गुरूद्वारे की संगत तुझे दुआओं में याद करती होगी, तू …