Charity

Increasing the dose of laughter in our lives, to completely eradicate stress from its roots. Add life as you or they age, the world needs to see more of those curves. Yes, it begins at home.

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#27 Shayari

वक़्त की पाबंदियां कहां, दो-चार बातें और कह जाओ, लफ़्ज़ों में तुम बयां करना, तहज़ीब हम रखेंगे, तुम्हें बताने को कहानियां मिल जायेंगी, हम उसे गुफ्तगू कह देंगे.

क्या था?

क्या था, चुभा तो सही, जुदा तो था, टूटा भी वही, अपना ही था, कोई गैर नहीं, धोका ही था, या था प्यार कहीं, वो अश्कों से बहा, मायने लफ़्ज़ों के नहीं, थम गयी वो घड़ी, मुस्कुराहट रुकी ही नहीं, कलम शिकवे लिखती है, स्याही लाल बिखरती नहीं, उब गए अब तो, वो नाम याद …