#7 Shayari

इतने सालों से उसी किरदार में रहा, जो तुझे पसंद था, अब नए रंग और मंच की तलाश में हूं, चाहे तू नापसंद कर मुझे.

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सब कुछ है तू…

जब नाम लिखना ही तेरा है, तो कलम उठाना ही क्यों? जब ज़हन में सिर्फ तू ही है मेरे, तो दिल से कुछ पूछना ही क्यों? जब तेरे सिवा कोई चेहरा दिखता ही नहीं, तो नज़र फेर के किसी और को धुंडू भी क्यों? जब ज़िन्दगी में पाना ही सिर्फ तुझे है, तो तुझे खोकर …

#6 Shayari

मेरे चेहरे की हंसी को वो खुशी समझ बैठे हैं, उन्हें क्या पता की वजह में सबको उनका नाम बताये बैठे हैं.

#5 Shayari

मुझे समझना है तो मेरे पास बैठ, दिल की किताब खुलने दे, मैं सरसरी हवा नहीं जो तुझे महसूस होते ही गुज़र जाऊंगा.