इश्क नहीं, इबादत कहिए…

उसे दीवानगी कहिए, या जूनून, एक आस कहिए, या आखरी ख्वाहिश, सिर्फ एक पल वो हमें उधार दे जाएं, तो फिर से जी उठेंगे हम. दीदार-ए-मोहब्बत तो हम कर चुके, मगर उस बेवफा को कौन समझाए, ऐ खुदा तेरा करम ऐसा हो कि उसकी झलक पाते ही, मेरा प्यार रुक्सत हो जाए. दर्द नहीं, वो [...]

मेरी मां…

वो मुझे पहली बार देख कर मुस्कुरायी ऐसे, जैसे सजदे में उसके जन्नत समाई हो. वो हाथ फेर कर बोली ऐसे, जैसे खुदा का नूर मुझमे ही पाया हो. वो सीने से मुझे लिपट कर प्यार करती है ऐसे, जैसे मेरी ज़िन्दगी उसके लिए एक तौहफा हो. वो मेरी गलती पर मुझे समझाती है ऐसे, [...]