इश्क नहीं, इबादत कहिए…

उसे दीवानगी कहिए, या जूनून, एक आस कहिए, या आखरी ख्वाहिश, सिर्फ एक पल वो हमें उधार दे जाएं, तो फिर से जी उठेंगे हम. दीदार-ए-मोहब्बत तो हम कर चुके, मगर उस बेवफा को कौन समझाए, ऐ खुदा तेरा करम ऐसा हो कि उसकी झलक पाते ही, मेरा प्यार रुक्सत हो जाए. दर्द नहीं, वो …

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मेरी मां…

वो मुझे पहली बार देख कर मुस्कुरायी ऐसे, जैसे सजदे में उसके जन्नत समाई हो. वो हाथ फेर कर बोली ऐसे, जैसे खुदा का नूर मुझमे ही पाया हो. वो सीने से मुझे लिपट कर प्यार करती है ऐसे, जैसे मेरी ज़िन्दगी उसके लिए एक तौहफा हो. वो मेरी गलती पर मुझे समझाती है ऐसे, …

First person that comes to your mind is…?

Now-a-days we all behave like matures all the time. Be it your colleagues that you go dinner with? Your family reunion? Meeting your old school gang, when once we used to be ridiculously crazy at doing stuff & now behave decently as everyone brings their wives along & some also their kids 🙂 Earlier those …